Ye jo zindagi ki kitaab hai

मानसपटल पर किताब शब्द के उभरते ही मुद्रित अक्षरों से लबालब ज्ञान की तहरीरें साकार होने लगती हैं।बचपन की दहलीज पर कदम रखते ही किताब में मुद्रित अक्षरों से तो हम बहुत कुछ सीखते आए हैं पर खुद किताब भी जिंदगी के कई सबक,सलीके और इफरात फ़लसफ़े सिखाती है ।आईए देखते हैं क्या क्या सिखाती है हमें हमारी किताब —

• सुव्यवस्था से बनती है बात

अपनी कोई भी पसंदीदा किताब उठाइए, आप आवरण से अंत तक एक लय, क्रमबद्धता,तारतम्यता और संयोजन पाएंगे।पन्ने दर पन्ने,हर्फ़ दर हर्फ़ निहित यह सुव्यवस्था ज्ञान की ग्राह्यता को आसान बनाती है।हमारा जीवन भी हमसे ऐसी ही सुव्यवस्था की चाह रखता है।जिंदगी पृष्ठ दर पृष्ठ अनुशासित, लयबद्ध, सरल-सहज सुलझी हुई होगी तो निःसन्देह प्रभावशाली रहेगी।एक धागा हर एक पन्ने को बाँधकर उन्हें एक किताब के स्वरूप में परिवर्तित कर देता है बस इसी तरह नियम -कायदे,अनुशासन से आबद्ध सुरुचिपूर्ण जीवन हमारे मूल्य को कई गुना बढ़ा देता है ।

• वरीयता दीजिए समग्र प्रभाव को

यह किताब से मिलने वाला एक बहुमूल्य सबक है।कोई भी किताब ढेर सारे पृष्ठों, विषयवस्तु, खंड या अध्यायों का संकलन होती है।आप उक्त किताब पर सरसरी नजर डालकर या महज मुखपृष्ठ देखकर उसकी गुणवत्ता का आकलन नहीं कर सकते।ईमानदारी पूर्वक,धैर्यपूर्वक ग्राह्य भाव से पढ़ने के बाद ही उक्त किताब की सही समीक्षा की जा सकती है।इसी प्रकार किसी व्यक्ति, परिस्थिति या विचार को तपाक से खारिज कर देना या अत्याधिक सम्मोहित हो जाना दोनों ही बातें आपकी निर्णय क्षमता और चयन प्रक्रिया पर प्रश्नचिन्ह लगाती हैं।एक कहावत है- नैवर जज ए बुक बाई इट्स कवर।जैसे महज आवरण देखकर किसी किताब का मूल्यांकन नहीं किया जा जा सकता उसी तरह सिर्फ बाहरी सजधज या तामझाम से किसी इंसान या वस्तु का मूल्य तय नही किया जा सकता।

• गुणवत्ता से बनती है बात

कई बार सिर्फ एक किताब लिखने में लेखक का पूरा जीवन निकल जाता है पर अनुभवों और वैचारिक शक्ति को मथकर निकली वही इकलौती किताब या चुनिंदा साहित्य इतिहास रचकर लेखक को अमर कर देती है।ऐसे उदाहरण जीवन में गुणवत्ता, कला और सौंदर्य के महत्व को परिभाषित करते हैं।चुनिंदा किंतु सार्थक उद्देश्य जीवन प्रत्याशा को बढ़ाते हैं।जीवनशैली,कार्यशैली में कुशलता,सलीका,समर्पण आपको एक खास टैग प्रदान करता है।बड़े और महत्वपूर्ण लक्ष्य हासिल करने में धैर्य और परिश्रम की जरूरत होती है पर यही आपको परिभाषित भी करते हैं।

• सुधार और बेहतरी की गुंजाइश हमेशा रहती है

यह मूल्यवान सीख भी किताबों से ही मिलती है।कई बार दीमक ,नमी ,सीलन या पाठक की लापरवाही की वजह से किताबें जीर्ण शीर्ण होकर अपनी स्वाभाविक गंध और चमक खो देती हैं।उनके मुखपृष्ठ बदरंगे हो जाते हैं या पन्ने पन्ने बिखर जाते हैं तब जिल्दसाज अपनी कलात्मक कुशलता से इन किताबों को पुनः आकर्षक और पठनीय बना देता है।हम सबकी जिंदगी में भी कई बार ऐसे दौर आते हैं जब सब कुछ बिखर जाता है पर धीरज के साथ डटे रहे और भरोसा रखें आपके अंतस का कारीगर एक बार फिर आपको तराशकर पूर्ववत बल्कि कई बार पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली बना देता है।

• कीजिए बदलाव का स्वागत

जिस प्रकार समय काल और परिस्थिति के अनुसार नवीनतम साज सज्जा और पाठ्यसामग्री में फेरबदल के साथ किताबों के संशोधित संस्करण आते रहते हैं जो उनके मूल्य,गुणवत्ता और उपयोगिता को बढ़ाते हैं ।ई बुक्स भी बदलते वक्त की आवश्यकता बन चुकी हैं।जिंदगी में भी बदलते समय के साथ परिवर्तन यानि कुछ नया जोड़ने की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है।

- Sindhu.

By Sindhu Kanhowa

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रश्मि
रश्मि
8 days ago

बहुत सटीक आकलन। मानव जीवन और किताब का।

Sindhu kanhowa
Sindhu kanhowa
8 days ago

नवाजिश करम शुक्रिया मेहरबानी 🙏

Shalini Tiwari
Shalini Tiwari
8 days ago

किताबों का ज्ञान वास्तव में बहुमूल्य और शाश्वत होता है, जो व्यक्तित्व विकास, मानसिक शांति और एकाग्रता को बढ़ाकर हमें बेहतर इंसान बनाता है। ये ज्ञान के द्वार हैं, जो इतिहास, संस्कृति और विज्ञान से परिचित कराकर हमारे दृष्टिकोण को व्यापक बनाती हैं। किताबें हमें जीवन के हर पड़ाव पर मार्गदर्शन करती हैं, आत्म-सुधार में मदद करती हैं और तनाव दूर करने में सहायक होती हैं।

Sindhu kanhowa
Sindhu kanhowa
8 days ago
Reply to  Shalini Tiwari

सुंदर,सिलसिलेवार,श्रेष्ठ प्रतिक्रिया🌺🌺🌺

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