शौक ए दीदार अगर है, तो नजर पैदा कर …….

आज अपनी बात कहने के लिए मै ' चिकन सूप फॉर द सोल'कहानी संग्रह से डी डी रॉबिन्सन जी की एक एक शिक्षाप्रद कहानी लेकर आई हूँ। कहानी कुछ यूँ है कि एक बूढ़ा हर रोज अपनी कुर्सी पर इस संकल्प के साथ दिन भर बैठा रहता था क़ि जब तक वह ईश्वर को नहीं देख लेगा तब तक इस जगह से बिलकुल नहीं हटेगा।

अपनी इसी जिद पर अड़ा वह बुजुर्ग बसंत की एक बेहद खुशनुमा दोपहर को अपनी कुर्सी पर झूलता हुआ ईश्वर की खोज में जुटा था। उसने सड़क के पार एक छोटी बच्ची को गेंद खेल रही थी ,अचानक उस बच्ची की गेंद बुजुर्ग के आंगन में आ गई। बच्ची दौड़कर गेंद उठाने आई और उसने बुजुर्ग की ओर सवालिया नजरों से देखकर कहा 'सर ,मै रोज देखती हूँ ,आप अपनी कुर्सी पर झूलते हुए ,परेशान से रहते हैं।'कुछ खो गया है क्या आपका , आपको किसकी तलाश है ?

बुजुर्ग ने जवाब दिया ' ओह मेरी प्यारी बच्ची ,तुम अभी इतनी छोटी हो ,तुम नहीं समझोगी।

शायद आप सच कह रहे हों पर मेरी मम्मी हमेशा मुझसे कहती है कि अगर मेरे दिमाग में कोई बात हो तो मुझे उसके बारे में बातचीत करना चाहिए। वे कहती हैं कि इससे हम समस्या को ज्यादा अच्छी तरह समझ सकते हैं। मेरी मम्मी हमेशा कहती हैं 'लिज़ी अपने विचार बताया करो। बताइए न सर ,बच्ची ठुनकते हुए बोली।

ओह!अच्छा लिज़ी ,लेकिन मुझे नहीं लगता तुम मेरी मदद कर सकती हो ,बूढ़ा व्यक्ति बुदबुदाया। पर सर हो सकता है मैं मदद कर सकूं ,लिज़ी के लहजे में आत्मविश्वास झलक रहा था। 'ठीक है लिज़ी तो सुनो ,मै ईश्वर की खोज कर रहा हूँ। लिज़ी ने हैरानी के साथ सवाल किया ,आप ईश्वर की खोज में अपनी कुर्सी पर हर दिन झूलते रहते हैं ? हाँ ,लिज़ी मुझे मरने से पहले यकीन करना है कि ईश्वर है। मुझे कोई निशानी चाहिए ,जो अभी तक मुझे नहीं मिली है। बुजुर्ग के स्वर में निराशा थी।

निशानी सर ? निशानी ?लिज़ी अब बूढ़े इंसान के शब्दों से काफी दुविधा में पड़ चुकी थी। 'सर ईश्वर आपको निशानी देता है जब आप अपनी अगली साँस लेते है। जब आप ताजे फूलों की खुशबू लेते हैं। जब आप चिड़ियों की चहचहाहट सुनते हैं ,जब आप किसी नन्हे बच्चे की किलकारी सुनते हैं। सर ,ईश्वर आपको निशानी देता है वह बहती हुई हवा में ,इंद्रधनुष में और मौसमी बदलाव के माध्यम से निशानी देता है , सभी निशानियां तो मौजूद है पर उनमे आपको यकीन नहीं है। अब भला और कौन सी निशानी चाहिए आपको ? सर ईश्वर आपमें है ईश्वर मुझमे है। उसकी खोज से कोई फायदा नहीं है क्योकि वह हर कण में मौजूद है।

एक हाथ अपनी कमर पर रखकर और दूसरा हाथ हवा में लहराते हुए लिज़ी बोली 'मम्मी कहती हैं कि लिज़ी अगर तुम किसी बड़ी चीज़ की खोज कर रही हो तो तुमने अपनी आँखे बंद कर ली हैं। क्योकि ईश्वर तो हर छोटी छोटी चीज में है । सभी चीजों में जीवन देखना ही ईश्वर को देखना है। लिज़ी बेटी ईश्वर के बारे में तुम्हारा ज्ञान सराहनीय तो है परन्तु तुम जितना जानती हो वह पर्याप्त भी नहीं है बेटा ,बुजुर्ग के स्वर में निराशा और असंतुष्टि थी। लिज़ी आसानी से हार मानने वाली नहीं थी ,वह बुजुर्ग के दिल पर हाथ रखकर मुस्कुराते हुए कानों में फुसफुसाई 'यह मेरी आवाज नहीं है सर ,जरा गौर से सुनिए ,यह आपके ही दिल की आवाज है।' अपने दिल के आईने में झांकिए सर, फिर आपको सारी निशानियाँ मिल जाएंगी। फिर लिज़ीअपनी बॉल सहित दौड़कर सड़क के पार जा पहुंची और एक फूल को सूँघते हुए जोर से चिल्लाई 'मम्मी हमेशा कहती हैं' लिज़ी अगर तुम किसी बहुत बड़ी चीज को तलाश कर रही हो तो इसका मतलब है कि तुमने अपनी आँखें बंद कर ली है।

बस इस खूबसूरत वाक्य के साथ कहानी समाप्त हो जाती है। मेरी नजर में इस छोटी सी पर अर्थपूर्ण कहानी से खुशहाल और सार्थक जिंदगी से जुड़े कई बेशकीमती सबक निकलकर आते हैं। पहला सबक यह है कि भले ही हम सबके जीवन का अंतिम या महत्वपूर्ण मकसद कहानी के बुजुर्ग की तरह सर्वोच्च सत्ता से साक्षात्कार का न हो परन्तु अधिकांश जनसमूह की दौड़ या छटपटाहट किसी अद्भुत ख़ुशी की प्राप्ति, बहुत बड़ी ख्वाहिश और असीमित महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति को लेकर होती है और इस बदहवासी भरी भागमभाग में हम भूल जाते है कि सुख हमारे आसपास ही छिटका है ,खुशी की तमाम निशानियां हमारे ही चारों ओर बिखरी पड़ी हैं।यकीनन छोटे छोटे को जोड़कर ही बड़ा बनाया जा सकता है। बहुत बड़ी ख्वाहिशों को टुकड़ो टुकड़ों में भी हासिल किया जा सकता है। ख़ुशी या उपलब्धियों की नन्ही लड़ियाँ ही कतारबद्ध होकर विशाल बन सकती हैं। रोजाना के छोटे छोटे नियमित प्रयास अप्रत्यशित परिणाम भी ले आते हैं , इन इफरात और सहज उपलब्ध सौगातों को नजरअंदाज कर अधिकांश की नजरे अकल्पनीय चीजों पर टिकी है। अमूमन दौड़ वहाँ की है जो पहुँच से बहुत दूर या क्षमता से परे है। दूसरा महत्वपूर्ण सूत्र यह कि कतई जरूरी नहीं कि आपको अपनी जिज्ञासाओं का समाधान,जटिल गुत्थियों के हल या दुविधाओं का निदान किसी प्रकांड पंडित ,विद्वान व्यक्ति या महान ग्रंथों के माध्यम से ही मिले कई बार बेहद नादान ,भोले भाले ,उम्र और अनुभवों में आपसे कमतर इंसान भी जिंदगी के कई महत्वपूर्ण फलसफे सिखा जातें हैं बशर्ते आप सीखना चाहें।

तीसरा सूत्र यह कि हर बड़ी खोज या महान लक्ष्य सजग ,,सकारात्मक ,संकल्पवान मस्तिष्क के साथ,बेहद प्रतिबद्ध ,अनुशासित जीवन पद्धति और शारीरिक स्फूर्ति के सम्मिलित परिणाम से हासिल होते हैं। कई बार हमारे परम् उद्देश्य भी कहानी के बुजुर्ग व्यक्ति की तरह ही होते हैं हम चाहते तो बहुत कुछ हैं पर क्या हमारे प्रयासों में भी ईमानदारी है ? उक्त बुजुर्ग में सर्वोच्च सत्ता से साक्षात्कार या ईश्वर की निशानियों की खोज के प्रति दीवानगी तो झलक रही है पर हासिल करने की संजीदगी बिलकुल नहीं। सिर्फ निष्क्रिय और जड़वत बने रहकर और अपनी मान्यताओं के कोकून में कैद होकर हम कुछ बड़ा हासिल नहीं कर सकते । एक महत्वपूर्ण सूत्र यह भी निकलकर आता है कि कई बार राहें खुलने को आतुर होती हैं ,उलझनें सुलझना चाहती है समाधान खुद चलकर हमारे पास आते हैं ,बहुत बार ईश्वर खुद अपने किसी फ़रिश्ते को भेजते हैं पर अपनी जिद और नकारात्मक रवैये की वजह से हम इन संकेतों को नजरअंदाज करते रहते हैं।उक्त बुजुर्ग व्यक्ति के पास भी एक नन्ही बच्ची के रूप में फ़रिश्ते का आगमन हुआ पर अपने पूर्वाग्रहों और मान्यताओं पर अड़े बुजुर्ग ने बच्ची द्वारा दिए गए सूझबूझ भरे समाधान में कोई रूचि नहीं ली।

- Sindhu Kanhowa

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Chitransh
Chitransh
2 years ago

अत्यंत प्रेरणादायक

Rashmi upadhyay
2 years ago

बहुत ही सार्थक,आध्यात्मिक,मार्मिक एवं शिक्षा प्रद ।

Aayushi jain
Aayushi jain
2 years ago

बहुत ही खूबसूरत और जीवन के लिए प्रेरणादायी

Rashi Upadhyay
Rashi Upadhyay
2 years ago

Bahut shandar👏

Prashant Dixit
2 years ago
Reply to  Rashi Upadhyay

बहुत सुंदर लेखनी एवं सकारात्मक विचारों को आपने सुदर शब्दों में पिरोया है
आपने

Bharti Juneja
2 years ago
Reply to  sindhu

Very very nice ,heart touching 🙇🙇❤️❤️🌹🌹👍👍💔💔😙😙

Charu
Charu
2 years ago

मतलब ईश्वर हर समय किसी न किसी रूप में हमारे साथ है,बस जरूरत होती है महसूस करने की,

jl9login
25 days ago

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