समृद्धि मस्तिष्क की
श्री श्री रविशंकर जी का एक कथन कहीं पढा था कि मस्तिष्क को एक अच्छी किताब की तरह सुव्यवस्थित कीजिए।इस शानदार कथन को पढ़ते ही मेरे रचनात्मक मन से अगला संबद्ध विचार तुरंत गूँज उठा कि - -- यदिआप निरंतर इस सुव्यवस्थापन की दिशा में निरंतर प्रयास करेंगे तो आपकी जिंदगी किसी लाइब्रेरी की तरह सुव्यवस्थित और समृद्ध होती चली जाएगी।
जब आध्यात्मिक गुरु के उक्त कथन पर मनन किया तो यह स्वीकारोक्ति भी आई कि निःसन्देह मस्तिष्क की किताब में हम सबने बहुत सारे झोल पैदा कर लिए हैं। कई तरह की कड़वाहटों, किसिम किसिम के अपराध बोध, बेहिसाब संदेह, चिंता ,भय और तमाम तरह के पूर्वाग्रहों और अनेक कटु स्मृतियों के स्याह बदरंग,मैले कुचैले पन्ने जमा होते जा रहे हैं ।इन तमाम दिमागी जालों अटालों ,दिन रात की उधेड़बुन के बीच से कुछ श्रेष्ठ निकालना ,सृजनात्मक विचारों का अंकुरित होना यानि दिमाग की बेशकीमती क्षमता का दोहन करना बहुत मुश्किल काम है।क्योंकि विचारों से ही जीवन बनता है। अमूमन हम सभी इस मगजमारी में खुद को उलझाए हुए हैं ।पर जब जागे तब सबेरा की तर्ज पर देर कभी नहीं होती ।अच्छा विचार जब भी ,जहां से भी मिले अमल करने की ठान लें तो आप सुखद अंजाम तक पहुँच ही जाएंगे। मस्तिष्क की लाइब्रेरी का रख रखाव,प्रबंधन और साज सज्जा रोजाना के प्रयास और निरंतर अभ्यास से संभव हो सकता है। धीरे धीरे नकारात्मक ,तकलीफ दायक और जड़तापूर्ण विचारों के बेतरतीब , जर्जर पन्ने व्यवस्थित और सुसज्जित होते चले जाएंगे।
दिमागी किताब की इस जिल्दसाजी ,इस रफूगरी को साधने के हुनर का श्री गणेश अलसुबह से ही इस भरोसे के साथ कीजिए कि
• सुबह की सुरताल एक वरदान -
हर सुबह कुछ शांत,सुहाने ,खूबसूरत पल सिर्फ अपने लिए रखिए।घर ,बगीचे या पार्क का कोई एकांत कोना चुन लीजिए,जहां हर रोज आपकी पहुँच आसान हो ।इस दौरान मन को बाहरी प्रभाव से अछूता रखकर कुछ पल गहरी सांसें लेने का अभ्यास करें ,ध्यान या प्रार्थना कीजिए ।हर एक मस्तिष्क की गहरी परतों के बीच कहीं एक अचरज से भरा बेशकीमती मोती मौजूद रहता है।सुकून,शांति और एकाग्रता के अभ्यास से यह सौंदर्य यह सारतत्व तराशा जा सकता है। सुबह की शांत बेला में कुछ अच्छा पढ़िए, कुछ अच्छा लिखिए ,टू डू लिस्ट बनाइए।लगातार किए गए इन प्रयासों से अभ्यास से धीरे धीरे भोर की बेला के साथ आपके शरीर और मस्तिष्क की एक लय बन जाएगी। सुबह को साधने से मस्तिष्क की किताब की सुव्यवस्था और समृद्धि का सलीका आना शुरू हो जाएगा।
• कुदरती करिश्मे यानि स्फूर्तिदायक टॉनिक-
गर आप प्रकृति प्रेमी हैं तो बेहद सौभाग्यशाली हैं ,नहीं भी हैं तो आदत डालिए प्राकृतिक दृश्यावलियों के साथ खुद को जोड़ने की।अपने दिन का कुछ हिस्सा कुदरती करिश्मों के नाम कीजिए।पेड़ पौधों के साथ वक्त बिताने, बाग बगीचों,प्राकृतिक स्थानों में चहलकदमी करने ,पेड़ पौधों के साथ वक्त बिताने,यथासंभव नए पौधे रोपने और उनकी साज संभाल करने से मन आनन्दित होता है।कुदरती जुड़ाव से धीरज,सहनशीलता ,उदारता,समायोजन क्षमता जैसे सदगुण विस्तार पाते हैं।कुदरती समृद्धि मन मस्तिष्क को भी समृद्ध करती है।खुशी,उत्साह और कौतूहल बढाने वाले रसायनों को सक्रिय करती है।बेशक कुदरत मन मस्तिष्क की सुव्यवस्था और समृद्धि में सहयोगी सिद्ध होती है।
• विषैली सोच नो एंट्री-
यदि आप मन- मस्तिष्क की सुव्यवस्था और समृद्धि हेतु कृत संकल्पित हैं तो विचारों की आवाजाही को लेकर सजग और सावधान बने रहें।नींद के अलावा दिमाग कभी भी विचारों से रिक्त नहीं रहता।हर वक्त किसिम किसिम के विचारों का चक्र निरंतर चलता रहता है।हम साधारण इंसान हैं महामानव नहीं । सहज मानवीय स्वभाव के चलते भय,नफरत,ईर्ष्या, कटु स्मृतियों के साथ बहुतेरे कटु,बोझिल और नकारात्मक विचार जब तब चले आएंगे और फिर इन्ही विचारों की कड़ी बन कर दिमागी उथल पुथल मचा देती है पर सजग रहकर इस कड़ी को तोड़ा जा सकता है।बस आप अनुशासित और संकल्पित रहिए कि ज्यों ही नकारात्मक विचारों की कड़ी बनना शुरू होगी , आप शीघ्र ही उत्साह, उम्मीद ,खुशी से भरे सकारात्मक विचारों और मधुर स्मृतियों को इनकी जगह प्रतिस्थापित करने का प्रयास करेंगे ,जल्दी ही मस्तिष्क में श्रेष्ठ सकारात्मक विचारों का चक्र चलने लगेगा और दिमाग सुव्यवस्था की ओर बढ़ने लगेगा।जहां सुव्यवस्था ,वहां समृद्धि आएगी ही
• लक्ष्यों से सुसज्जित हो जीवन-
गर एक डिज़ाइनर मस्तिष्क की चाह है तो उद्देश्यपूर्ण जीवन चुनिए।खाली दिमाग,शैतान का घर साबित होता है। रोजमर्रा के छोटे -बड़े उद्देश्य दस्तक देते रहते हैं,सावधान करते रहते हैं कि दिमाग को गॉसिप ,आरामतलबी और व्यर्थ की मगजमारियों से बचाना है।ये तमाम छोटे बड़े मकसद दिमाग से फालतू कचरा बुहार देते हैं। मस्तिष्क को किसी सुंदर ,श्रेष्ठ किताब की तरह समृद्ध करने में छोटी छोटी चुनौतियाँ, रोजाना के लक्ष्य मील का पत्थर साबित होते हैं और सृजनात्मक, उन्नत,अभिनव विचारों के प्रस्फुटन में सहयोगी साबित होकर दिमाग की किताब में एक अदद खूबसूरत पन्ना जोड़ देते हैं।
चार्ल्स हॉनेल कहते हैं - "एक दुनिया अंदर भी है,विचारों की,अहसास की और खूबसूरती की ,ये दुनिया भले ही न दिखती हो पर इसकी ताकत असीम है।" बस निरंतर सजग ,प्रयत्न शीलऔर संकल्पित बने रहिए ।दिमाग सुव्यवस्थित और समृद्ध होगा तो जीने के अंदाज और तौर तरीकों में तब्दीली आनी शुरू हो जाएगी।





Bahut shandar❤️
स्नेहाशीष बिटियारानी💕💕💕
बहुत उच्च कोटि के सुझाव
अभिनन्दन संग शुक्रिया बिन्नी 😃
Aaj ke samay ka atal satya hai ..Anusarnatmak blog badi maa.
Aise hi hum sb ko seekh dete rahiye apne vicharo se .
स्नेहाशीष बिटिया रानी 🌺🌺🌺
अति सुन्दर एवं प्रेरणापूर्ण विचार ।
शुक्रिया 🌺🌺🌺
प्रिय चित्रांश स्नेहाशीष 🌺
सुंदर सुझाव है और सरल भी कोशिश करूंगी रोज सुबह अपनानेकी
सादर अभिवादन संग असीम धन्यवाद दीदी जी 🙏
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