एक गूँज है जिंदगी
आज मैं अपनी बात कहने के लिए बतौर स्मृति ,मस्तिष्क में दर्ज कई साल पहले पढ़ा गया एक छोटा सा आध्यात्मिक प्रतिसंवाद लेकर आई हूं ।हो सकता है प्रतिसंवाद का स्वरूप कुछ बदल गया हो पर मूल भावना यथावत है। प्रतिसंवाद कुछ यूं कि एक दार्शनिक अपनी मित्र मंडली के साथ किसी मनोहारी प्राकृतिक स्थल की सैर पर गए। वहाँ स्थित पहाड़ पर एक खास ईको पॉइंट था जहाँ एक बार कोई आवाज करने पर वही आवाज पहाड़ की घाटियों से टकराकर सात बार वापिस आती थी।दार्शनिक के समूह में शामिल एक मित्र कई पशु पक्षियों की हूबहू आवाज निकालने में माहिर थे।उन्होंने कुत्ते की आवाज निकाली, पहाड़ चारों तरफ से कुत्ते की आवाज निकलने लगे। फिर उन्होंने उल्लू की आवाजें निकालना शुरू किया ,पहाड़ की घाटियों से टकराकर उल्लू की आवाज वापिस आने लगी ।अब तो उन्हें मजा आने लगा ,उन्होंने शेर की तरह गर्जना की ।अपनी स्वाभाविक संरचना की वजह से पहाड़ दहाड़ने लगे।हर आवाज की प्रतिक्रिया स्वरूप क्रमशः ये प्रतिध्वनियाँ ख़ौफ़नाक होती जा रही थीं और जो खूबसूरत सुरम्य वादियाँ अभी कुछ ही पल पहले तक मन मोह रही थी वे सहसा भयभीत सा करने लगी।वातावरण को यूँ बोझिल होते हुए देखकर दार्शनिक अपने मित्र से बोले क्या आप कोयल की आवाज भी निकाल सकते हैं उन्होंने गर्वित होकर हामी भरी तो दार्शनिक बोले तो फिर कुत्ते और उल्लू और शेर की ही कर्कश और डरावनी आवाजें क्यों ? आप कोयल की मीठीआवाज निकालिए ।अब जैसे ही उनके मित्र ने कोयल की आवाजें निकलना शुरू किया। वातावरण में मधुर स्वर गूँज उठा ।फिर क्या था पल भर में पूरा परिदृश्य ख़ुशगवार हो गया ।
दार्शनिक ने अपने मित्र से कहा आपने देखा आपकी सार्थक गूँज का प्रतिदान ,पल भर में बेजान घाटियों के सुर बदल गए।फिर वे बोले जीवन के महान नियमों में से एक है हम जो देते हैं जीवन को अपने सिक्के ,जिंदगी भी वही सिक्के हमें वापिस लौटाती है ,भले ही लौटने में देर लग जाए। आगे वे कहते हैं एक छोटा सा बीज आपने बो दिया,फिर सारी दुनिया की ताकत उसे मिलने लगती है।परिणामस्वरूप नफरत,द्वेष की ऊर्जा आपकी ओर बहना शुरू हो जाएगी।आपने प्रेम बोया तो संसार भर की शुभ शक्ति आपकी तरफ प्रवाहित होने लगेगी।चारों ओर से हमारी ही फेंकी ध्वनियां प्रतिध्वनित होकर हमें मिल जाती हैं।जगत प्रतिदान करता है ,हजार गुना होकर लौटता है।
आज अपनी बात कहने के लिए मैं अकिंचन इस प्रतिसंवाद के साभार सहयोग से अपनी समझ और अनुभूति के आधार पर उक्त सूत्र को विस्तार देने का छोटा सा प्रयास कर रही हूँ।
ऊर्जा का अचूक नियम है कि वह घूम फिर कर वापिस आती है बस सारा खेल हमारी च्वॉइस पर अटकता है ।ऊर्जा के खनकते,चमकते सिक्के बांटे जाएंगे तो कमोबोश जीवन में यही खनक,यही चमक वापिस आएगी भले ही रूप रंग कुछ बदला हुआ हो।
कई लोगों को अक्सर ही भरपूर स्नेह,जाने अनजाने मददगारों से इफरात स्नेह, सहयोग और संबल मिलता है।इनका जीवन कई अवाक और चमत्कृत करने वाले योग संयोग और समीकरणों का पुंज होता है ।अमूमन इन सौगातों को उनकी खुशकिस्मती से जोड़कर देखा जाता है जबकि यदि ऐसे व्यक्तियों की जीवन का गहराई से आकलन किया जाए तो हम पाएंगे कि यह खुशकिस्मती उन्होंने स्वयं अर्जित की है।यह उनके ही द्वारा बांटी गई सघन,उदार,विशाल और सकारात्मक ऊर्जा है जो देर सबेर उनके पास पहुँच जाती है।प्रश्न यह भी उठता है कि बहुत अच्छे लोगों के जीवन में भी कई बार तकलीफदायक प्रसंग आ जाते है ।निःसन्देह कुछ घटनाक्रम नियति के अधीन हैं जो हमारी उम्मीदों, क्षमताओं और योजनाओं से परे हैं।वरना अधिकांशतः हमारी ही अखंड ऊर्जा का प्रतिध्वनि स्वरूप पुनरागमन होता है।
किसी किसी के हिस्से में अक्सर ही अधिकांश जगह से नफरत,दुर्व्यवहार, कटुता मिलती है तो भला दुर्भाग्य की शिकायत क्यों? कहीं न कहीं यह भी उनके द्वारा वितरित नकारात्मक ऊर्जा का पलटवार है।विडम्बना यह कि हम बाँटते वक्त तो तंगदिल हो जाते है और अपनी बारी आने पर दरियादिली की उम्मीद करते हैं पर सृष्टि अपने नियमों पर कायम रहती है।
एक गूँज हमारे अंतस में भी हर पल सक्रिय रहती है जो हमारे नजरिए, आत्म संवाद,विचारशैली और भावनाओं से निर्धारित होती है,और हमारे शारीरिक मानसिक स्वास्थ्य और मूड को प्रभावित करते हैं। इसलिए अपने चिंतन मनन के प्रति सदैव सजग रहें।एक सरल उदाहरण से इस तथ्य को भलीभाँति समझा जा सकता है।किसी दिन आप संयोगवश सुबह आपकी आँख नही खुलती और आप अपने नियत समय से देर से सोकर उठते हैं फिर आपके हाथ से चाय का प्याला छूट जाता है बस आपके दिलो दिमाग पर एक विचार उभरता है कि आज का दिन बेकार जाएगा।आपकी इस निराशाजनक सोच के परिणामस्वरूप दिन भर में प्रतिकूल परिणाम देने वाली कई घटनाएं एक एक करके सामने आएंगी ।शाम ढलते ही आपकी यह धारणा पुष्ट हो जाएगी कि मुझे तो अलसुबह ही आभास हो गया था कि आज का दिन खराब रहेगा।जबकि सुबह यदि आशावान रहेंगे कि बाकी पूरा दिन मेरे हाथ में है अनुशासन और सजगता से उस पर काम करना है तो स्फूर्ति, उम्मीद और जज़्बे से लकदक लय निःसन्देह पूरा दिन संभाल लेगी।
यह तो एक छोटा सा उदाहरण था बहुतेरे अचरज भरे परिणाम हमारी सोच से निर्धारित होते हैंइसलिए तो कहते हैं कि शब्द ब्रम्ह है ,उनकी गूँज चमत्कारी होती है। चहुँओर हमारे अपने सुर ,हमारे मन,वचन और कर्म के प्रतिदान स्वरूप निर्मित प्रतिध्वनियाँ गूँजती हैं । अब चयन हमारा है कि हमारी गूँज सुख और आनंद से सराबोर हो मीठी मधुर और चाशनी पगी हो।
आज बस इतना शेष शीघ्र ही अगले ब्लॉग में।





चिन्तन करने योग्य बिषय चुना है आपने