कहीं देर न हो जाए …………

कहीं देर न हो जाए ………… आज मैं अपनी बात रखने के लिएआपको ओशो की एक कहानी लेकर आई हूँ।जर्मनी में एक नामी विद्वान था।उसने दुनिया भर में घूम करढेरों शास्त्र इकट्ठे किए।उसके मित्र उसके निजी पुस्कालय को देखकर ,अचरज से कहते तुम इन्हें पढ़ोगे कब ? और हमेशा ही उसका झल्लाहट भरा जवाब होता …

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मेरी माँ, मेरी पहली पाठशाला

मेरी माँ, मेरी पहली पाठशाला आज अंतरराष्ट्रीय मातृ दिवस पर मैं अपनी पहली पाठशाला यानि अपनी माँ के जीवन से जुड़े कुछ प्रेरक प्रसंग आप सबके साथ सांझा कर रही हूँ। मेरी मम्मी श्रीमती आशा तिवारी अत्यंत सहज सरल स्वभाव की उदारमना महिला थीं।वे एक उच्च शिक्षित महिला थीं जो एक ग्रामीण अंचल के शासकीय उच्चतर …

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समृद्धि मस्तिष्क की

समृद्धि मस्तिष्क की श्री श्री रविशंकर जी का एक कथन कहीं पढा था कि मस्तिष्क को एक अच्छी किताब की तरह सुव्यवस्थित कीजिए।इस शानदार कथन को पढ़ते ही मेरे रचनात्मक मन से अगला संबद्ध विचार तुरंत गूँज उठा कि – — यदिआप निरंतर इस सुव्यवस्थापन की दिशा में निरंतर प्रयास करेंगे तो आपकी जिंदगी किसी …

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जिन खोजा तिन पाइयां – – – –

जिन खोजा तिन पाइयां – – – – आज अपनी बात कहने के लिए मैंने ,कुछ दिन पहले किए गए एक छोटे से सफर में घटित प्रसंग को लिया है।वाकया कुछ यूं कि एक बड़े पर्व के दौरान में ट्रेन से यात्रा कर रही थी। त्योहारी भीड़ की वजह से बोगी पोर पोर मुसाफिरों से अटी थी।जितने …

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